केंद्र सरकार के राज्य मंत्री जयंत चौधरी ने पश्चिम एशिया में जारी तनाव का भारतीय कृषि पर होने वाले संभावित असर को लेकर चिंता जताई है। इस वैश्विक संकट से निपटने के लिए मंत्री ने एथेनॉल उत्पादन को तेजी से बढ़ाने की जरूरत पर बल दिया।
उन्होंने बागपत में एक जनसभा के दौरान स्पष्ट किया कि अंतरराष्ट्रीय बाजारों में होने वाली उथल-पुथल का सीधा असर भारतीय किसानों की जेब पर पड़ता है। उनका मानना है कि अंतरराष्ट्रीय ईंधन बाजार पर निर्भरता कम करके ही हम अपनी ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बाहरी झटकों से सुरक्षित रख सकते हैं।
मंत्री के अनुसार, एथेनॉल उत्पादन बढ़ने से गन्ने जैसी फसलों के लिए बाजार में एक स्थिर मांग पैदा होगी। इससे न केवल किसानों की आय में सुधार होगा, बल्कि उन्हें वैश्विक बाजार में होने वाले दामों के उतार-चढ़ाव से भी सुरक्षा मिलेगी।
जयंत चौधरी ने इस दौरान गन्ना किसानों के बकाया भुगतान का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि सरकार निजी चीनी मिलों की गतिविधियों पर पैनी नजर रख रही है। यह सुनिश्चित किया जाएगा कि किसानों का मेहनत का पैसा उन्हें समय पर मिले।
निष्कर्ष: पश्चिम एशिया के तनाव और अंतरराष्ट्रीय ईंधन बाजार की अस्थिरता से भारतीय ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बचाने के लिए एथेनॉल उत्पादन एक सुरक्षा कवच की तरह कार्य करेगा। जयंत चौधरी के अनुसार, ऊर्जा के लिए वैश्विक निर्भरता कम करने से न केवल किसानों को बाजार के उतार-चढ़ाव से मुक्ति मिलेगी।
बल्कि गन्ने जैसी फसलों की मांग में स्थिरता आने से उनकी आय में भी सुधार होगा। इसके साथ ही, सरकार का जोर चीनी मिलों द्वारा गन्ना बकाया का समयबद्ध भुगतान सुनिश्चित करने पर है, ताकि किसानों के आर्थिक हितों की रक्षा की जा सके और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को आत्मनिर्भर बनाया जा सके।
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