केंद्र सरकार प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाभियान (पीएम-कुसुम) योजना के अगले चरण को शुरू करने की तैयारी कर रही है। इस पहल का उद्देश्य किसानों को अपनी कृषि भूमि पर खेती जारी रखते हुए सौर ऊर्जा उत्पादन से अतिरिक्त आय अर्जित करने का अवसर देना है।
नई दिल्ली में आयोजित चौथे राष्ट्रीय एग्रो-आरई समिट को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने बताया कि सरकार योजना के संशोधित संस्करण पीएम-कुसुम 2.0 पर काम कर रही है। इसके विस्तार के लिए अधिक लक्ष्य और बढ़े हुए वित्तीय प्रावधान के साथ प्रस्ताव तैयार किया गया है, जिसे मंजूरी के लिए प्रधानमंत्री के समक्ष रखा गया है।
वर्ष 2019 में 34,422 करोड़ रुपय के प्रावधान के साथ शुरू की गई इस योजना का उद्देश्य कृषि क्षेत्र में नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देना और किसानों की सिंचाई लागत कम करना है। योजना के तहत मार्च 2026 तक 34,800 मेगावाट सौर क्षमता जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है।
अब तक इस योजना के अंतर्गत देशभर में 10 लाख से अधिक स्वतंत्र सौर ऊर्जा संचालित कृषि पंप स्थापित किए जा चुके हैं, जबकि 13 लाख से अधिक ग्रिड से जुड़े पंपों का सौरकरण किया गया है।
प्रस्तावित पीएम-कुसुम 2.0 में 10 गीगावाट का एग्री-फोटोवोल्टिक (एग्री-पीवी) घटक शामिल किया जाएगा। इसके तहत खेतों में फसलों के ऊपर सौर पैनल लगाए जा सकेंगे, जिससे खेती योग्य भूमि प्रभावित हुए बिना बिजली उत्पादन संभव होगा। इस मॉडल से विकेंद्रीकृत सौर ऊर्जा उत्पादन के साथ किसानों को अतिरिक्त आय का स्रोत भी मिल सकेगा।
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