पंजाब में गेहूं की रिकॉर्ड आवक शुरू होने से पहले केंद्र सरकार ने राज्य को बड़ी राहत दी है। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान और केंद्रीय खाद्य मंत्री प्रल्हाद जोशी के बीच हुई उच्च स्तरीय बैठक में करीब 155 लाख टन खाद्यान्न के त्वरित उठाव के लिए विशेष रेल रेक चलाने पर सहमति बनी है। यह निर्णय पंजाब में गहराते भंडारण संकट को देखते हुए लिया गया है।
वर्तमान में राज्य के गोदाम अपनी पूरी क्षमता के करीब पहुंच चुके हैं, जबकि इस सीजन में 130 से 132 लाख टन नए गेहूं की आवक का अनुमान है। अगर पुराना स्टॉक समय पर नहीं निकाला गया, तो नई फसल को खुले में रखने का जोखिम बढ़ सकता है।
अनाज की निकासी को गति देने के लिए रेलवे और खाद्य आपूर्ति विभाग ने परिचालन क्षमता बढ़ाने का खाका तैयार किया है। अधिकारियों के अनुसार, फिलहाल अनाज उठाव की गति करीब 5 लाख टन प्रति माह है। इसे बढ़ाकर कम से कम 12 लाख टन करने की जरूरत है ताकि खुले में भंडारण से बचा जा सके और अनाज की गुणवत्ता पर कोई बुरा असर न पड़े।
बैठक के दौरान केवल अनाज उठाव ही नहीं, बल्कि राज्य के वित्तीय हितों पर भी गंभीर चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने ग्रामीण विकास कोष के तहत केंद्र पर बकाया करीब 9,000 करोड़ रुपय की राशि का मुद्दा उठाया। केंद्र ने इस पर सचिव स्तर की बैठक कर जल्द समाधान निकालने का भरोसा दिया है।
इसके अतिरिक्त, पंजाब सरकार ने नकद ऋण पर बढ़ते ब्याज के बोझ और हाल ही में हुई ओलावृष्टि से किसानों को हुए नुकसान के लिए विशेष वित्तीय सहायता की मांग भी दोहराई है। अधिकारियों का मानना है कि अतिरिक्त रेल रेक मिलने से मंडियों में भीड़ कम होगी और खरीद प्रक्रिया सुचारू रूप से चल सकेगी।
निकासी की यह तेज गति न केवल अनाज की गुणवत्ता को सुरक्षित रखेगी, बल्कि किसानों को उनकी फसल के लिए समय पर जगह और भुगतान सुनिश्चित करने में भी मदद करेगी। यह पहल राज्य में गेहूं की खरीद को निर्बाध बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
पंजाब में गेहूं की आगामी भारी आवक और भंडारण की गंभीर समस्या को देखते हुए केंद्र और राज्य सरकार के बीच बनी यह सहमति एक समयोचित और राहतकारी कदम है। अतिरिक्त रेल रेको के माध्यम से अनाज निकासी की गति को दोगुना करना न केवल नई फसल को सुरक्षित रखने के लिए आवश्यक है, बल्कि यह मंडियों में भीड़ कम करने और खरीद प्रक्रिया को सुचारू बनाने में भी मददगार साबित होगा।
साथ ही, ग्रामीण विकास कोष और वित्तीय सहायता जैसे लंबित मुद्दों पर सकारात्मक चर्चा यह संकेत देती है कि यदि केंद्र और राज्य आपसी समन्वय से काम करें, तो कृषि प्रधान राज्य पंजाब के आर्थिक हितों और किसानों की मेहनत, दोनों की रक्षा की जा सकती है।
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