तुर्की में गेहूं की कटाई शुरू होने वाली है और उत्पादन की बेहतर संभावनाएं हैं, जो संभावित रूप से 22.75 से 23.25 मिलियन टन तक पहुंच सकती हैं। हालांकि, बदलती फसल पद्धतियों, निर्यात दबाव और कम वैश्विक कीमतों जैसी चुनौतियां अभी भी बनी हुई हैं। ऊर्जा, रसद और उर्वरकों से जुड़ी बढ़ती लागत और व्यापार में व्यवधान अनाज बाजार के परिदृश्य को और जटिल बना रहे हैं।
फसलों में नमी का स्तर 12% की सीमा के मुकाबले 22% तक पहुंचने के कारण पंजाब में गेहूं की खरीद अस्थायी रूप से रोक दी गई है। एजेंसियों ने खरीद रोक दी है, जबकि अधिकारी स्थिति का आकलन करने और गुणवत्ता संबंधी चिंताओं को दूर करने तथा सुचारू खरीद प्रक्रिया सुनिश्चित करने के लिए आगे के कदमों की योजना बनाने के लिए बैठक कर रहे हैं।
भारत द्वारा गेहूं निर्यात पर लगे प्रतिबंध में ढील देने के फैसले से मिस्र, बांग्लादेश और इंडोनेशिया जैसे देशों में इसकी मांग बढ़ गई है। पर्याप्त स्टॉक और प्रतिस्पर्धी कीमतों के चलते मौसम संबंधी गुणवत्ता संबंधी चिंताओं के बावजूद निर्यात की संभावनाएं आशाजनक दिख रही हैं। रिकॉर्ड तोड़ फसल और सरकारी कोटा से व्यापार को समर्थन मिलने और घरेलू कीमतों में स्थिरता बनाए रखने की उम्मीद है।
पंजाब और हरियाणा में भारी बारिश के कारण गेहूं की खरीद बाधित हो गई है, जिससे नमी का स्तर निर्धारित सीमा से अधिक हो गया है और फसल की गुणवत्ता प्रभावित हुई है। आवक तो अच्छी बनी हुई है, लेकिन खरीद धीमी हो गई है और किसानों को कीमतों और नुकसान को लेकर अनिश्चितता का सामना करना पड़ रहा है। मौसम संबंधी जोखिम कटाई के मौसम के लिए चुनौतियां पेश कर रहे हैं, इसलिए अधिकारी आगे के उपायों की समीक्षा कर रहे हैं।
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