पंजाब और हरियाणा के धान किसानों को पर्यावरण के अनुकूल खेती पद्धतियों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से चालू वित्त वर्ष के अंत तक कार्बन क्रेडिट प्रदान किए जाएंगे। कार्बन क्रेडिट जारी करने के पहले चरण में दोनों राज्यों के लगभग 30,000 एकड़ क्षेत्र को शामिल किया जाएगा, जिससे 50,000 से अधिक कार्बन क्रेडिट उत्पन्न होने की उम्मीद है।
ये क्रेडिट उन किसानों को मिलेंगे जो डायरेक्ट सीडेड राइस (डीएसआर) और कम या बिना जुताई वाली खेती जैसी जलवायु-अनुकूल पद्धतियां अपनाते हैं। ये तकनीकें जल उपयोग दक्षता बढ़ाने और मिट्टी में जैविक कार्बन के संरक्षण में मदद करती हैं। कृषि को जलवायु शमन से जोड़ने की दिशा में यह पहल एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
अधिकारियों के अनुसार, भविष्य में इस कार्यक्रम को अन्य क्षेत्रों और फसलों तक विस्तारित किया जा सकता है। धान और गेहूं की बुवाई से पहले इन पद्धतियों को अपनाने वाले किसान इस योजना के तहत पंजीकरण कराकर कार्बन क्रेडिट अर्जित कर सकेंगे। इन क्रेडिट्स को विमानन, खनन और उर्वरक निर्माण जैसे उद्योग खरीद सकेंगे, जहां परिचालन प्रकृति के कारण उत्सर्जन घटाना कठिन होता है।
कृषि मंत्रालय ने इसके लिए एक स्वैच्छिक कार्बन बाजार का ढांचा भी जारी किया है, जिसका उद्देश्य विभिन्न हितधारकों को जोड़ना और टिकाऊ कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देना है। भारत ने 2024-25 में लगभग 15 करोड़ टन चावल का उत्पादन किया, जिससे वह चीन को पीछे छोड़ते हुए दुनिया का सबसे बड़ा उत्पादक बन गया है। हालांकि, हरित क्रांति के बाद दशकों तक चली गहन खेती के चलते मिट्टी की उर्वरता में गिरावट भी दर्ज की गई है।
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