सही समय पर तुड़ाई से बढ़ेगी आम की मिठास, चमक और शेल्फ लाइफ

गर्मी के मौसम में जैसे-जैसे तापमान बढ़ता है, आम के फलों में परिपक्वता और पकने की प्रक्रिया तेज होने लगती है। यही वह समय होता है जब किसान तुड़ाई की तैयारी शुरू कर देते हैं। लेकिन केवल फल तोड़ लेना ही पर्याप्त नहीं है।

तुड़ाई से पहले अपनाई गई वैज्ञानिक सावधानियाँ ही तय करती हैं कि फल बाजार तक कितने सुरक्षित, आकर्षक और लंबे समय तक टिकाऊ रहेंगे। आज के समय में घरेलू बाजार के साथ-साथ निर्यात के लिए भी उच्च गुणवत्ता वाले, रोगमुक्त और समान रूप से पके फलों की मांग तेजी से बढ़ रही है। ऐसे में तुड़ाई पूर्व वैज्ञानिक प्रबंधन किसानों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हो गया है।

आम की तुड़ाई का उपयुक्त समय कैसे पहचानें?

आम की विभिन्न किस्मों में तुड़ाई का समय अलग-अलग होता है, लेकिन सामान्यतः फल की परिपक्वता पहचानने के कुछ प्रमुख संकेत होते हैं- फल का आकार पूर्ण विकसित हो जाना, छिलके का गहरा हरा रंग हल्का पड़ना, डंठल के पास गूदे में हल्का पीला रंग दिखना, फल की सतह पर हल्की चमक आना, फल के कंधे (शोल्डर) का उभरा हुआ दिखाई देना।

अत्यधिक कच्चे फलों की तुड़ाई करने से स्वाद, मिठास और सुगंध विकसित नहीं हो पाती, जबकि अत्यधिक पके फल परिवहन के दौरान जल्दी खराब हो जाते हैं। इसलिए सही परिपक्व अवस्था में तुड़ाई अत्यंत आवश्यक है।

तुड़ाई से पूर्व रोग प्रबंधन क्यों जरूरी है?

बरसात पूर्व बढ़ती आर्द्रता और तापमान के कारण आम में एन्थ्रेक्नोज, स्टेम एंड रॉट, स्कैब तथा बैक्टीरियल ब्लैक स्पॉट जैसे रोग तेजी से सक्रिय हो जाते हैं। कई बार खेत में स्वस्थ दिखने वाले फल भंडारण के दौरान सड़ने लगते हैं। इसलिए तुड़ाई से लगभग 15 से 20 दिन पहले सुरक्षात्मक फफूंदनाशी छिड़काव अत्यंत लाभकारी माना जाता है।

अनुशंसित छिड़काव: आम के फल की तुड़ाई से 15 दिन पहले 1 ग्राम थायोफेनेट मिथाइल 70 WP प्रति लीटर पानी का छिड़काव करने से फलों में तुड़ाई पश्चात होने वाली सड़न कम होती है तथा बाजार योग्य फलों की संख्या बढ़ती है।

वर्तमान शोधों में यह भी पाया गया है कि कॉपर आधारित जैव-सुरक्षित फफूंदनाशी तथा जैविक सूक्ष्मजीव आधारित उत्पाद भी रोग नियंत्रण में प्रभावी सिद्ध हो रहे हैं।

तुड़ाई का सही समय और वैज्ञानिक विधि

आम की तुड़ाई हमेशा सुबह या शाम के समय करनी चाहिए, जब वातावरण का तापमान अपेक्षाकृत कम हो। दोपहर में तुड़ाई करने से फलों में गर्मी का तनाव बढ़ता है, जिससे बाद में सिकुड़न और गुणवत्ता हानि की समस्या उत्पन्न हो सकती है।

तुड़ाई के समय ध्यान रखने योग्य बातें

फल को 8 से 10 सेमी डंठल सहित तोड़ें, तुड़ाई के लिए सिकेटियर या विशेष फल तुड़ाई उपकरण का प्रयोग करें, फल को पेड़ से गिरने न दें, तुड़ाई किए गए फलों को सीधे मिट्टी के संपर्क में न आने दें, घायल, रोगग्रस्त या कीटग्रस्त फलों को अलग रखें। आजकल कई राज्यों में“कलेक्शन बैग युक्त फ्रूट हार्वेस्टर”का प्रयोग बढ़ रहा है, जिससे फल टूटते नहीं हैं और गुणवत्ता बेहतर बनी रहती है।

डंठल से निकलने वाले रस (सैप) से होने वाली क्षति

ताजे तुड़ाए गए आमों में डंठल से दूधिया रस निकलना सामान्य प्रक्रिया है। यदि यह रस फल की सतह पर फैल जाता है, तो“सैप बर्न” बन जाता है, जिससे फल पर काले धब्बे पड़ जाते हैं। इससे फल का बाजार मूल्य काफी कम हो जाता है।

“सैप बर्न”से बचाव की वैज्ञानिक विधि

तुड़ाई के बाद फलों को उल्टा रखें, डंठल का दूध पूरी तरह निकलने दें, बाद में डंठल को छोटा काटें, फलों को छायादार स्थान पर रखें। निर्यात गुणवत्ता वाले फलों में आजकल“डी-सैपिंग रैक का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है।

तुड़ाई के बाद सफाई एवं रोगनिरोधक उपचार

तुड़ाई के तुरंत बाद फलों को साफ पानी से धोना चाहिए। इससे सतह पर लगी धूल, रोगजनक तथा लेटेक्स अवशेष हट जाते हैं। वैज्ञानिक अध्ययनों में पाया गया है कि गर्म पानी उपचार तथा सुरक्षित फफूंदनाशी उपचार से आम की शेल्फ लाइफ कई दिनों तक बढ़ाई जा सकती है।

सुरक्षित रोगनिरोधक उपचार

तोडे गए आम के फल को 1 ग्राम थायोफेनेट मिथाइल प्रति 2 लीटर पानी के घोल में कुछ मिनट डुबोने से भंडारण के दौरान सड़न कम होती है। इसके अतिरिक्त, वर्तमान समय में गर्म पानी उपचार (52 से 55°C) तथा कैल्शियम क्लोराइड उपचार को भी अत्यंत प्रभावी माना जा रहा है। ये तकनीकें फलों की कठोरता बनाए रखती हैं और जल्दी खराब होने से बचाती हैं।

आम पकाने की सुरक्षित एवं वैज्ञानिक विधियाँ

कैल्शियम कार्बाइड: स्वास्थ्य के लिए खतरनाक कुछ व्यापारी आम को जल्दी पकाने के लिए कैल्शियम कार्बाइड का उपयोग करते हैं। यह अत्यंत खतरनाक और गैरकानूनी तरीका है। इसमें आर्सेनिक और फॉस्फोरस जैसे विषैले तत्व हो सकते हैं, जो स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव डालते हैं।

इसके उपयोग से- फल बाहर से पीला लेकिन अंदर से कच्चा रह सकता है, स्वाद और सुगंध प्रभावित होती है, फल जल्दी सड़ने लगते हैं, उपभोक्ताओं में स्वास्थ्य जोखिम बढ़ता है। भारत सरकार ने फलों को पकाने के लिए कैल्शियम कार्बाइड के उपयोग पर प्रतिबंध लगाया हुआ है।

एथिलीन गैस: सुरक्षित और आधुनिक विकल्प

एथिलीन एक प्राकृतिक पौध हार्मोन है, जो फलों को समान रूप से और सुरक्षित तरीके से पकाता है। वर्तमान समय में निर्यात और बड़े बाजारों के लिए एथिलीन रिपनिंग चैंबर का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है।

एथिलीन तकनीक के प्रमुख लाभ

फल समान रूप से पकते हैं, प्राकृतिक रंग और सुगंध विकसित होती है, मिठास बेहतर होती है, फल लंबे समय तक आकर्षक बने रहते हैं, उपभोक्ताओं के लिए सुरक्षित। वैज्ञानिकों के अनुसार नियंत्रित एथिलीन उपचार से आम 24 से 48 घंटों में बेहतर गुणवत्ता के साथ पकते हैं।

आधुनिक पैकेजिंग और भंडारण तकनीक

आजकल केवल तुड़ाई ही नहीं, बल्कि पैकेजिंग और कोल्ड चेन प्रबंधन भी अत्यंत महत्वपूर्ण हो गए हैं।

वैज्ञानिक पैकेजिंग के लाभ

फलों में चोट कम लगती है, नमी की हानि घटती है, सड़न कम होती है, परिवहन के दौरान गुणवत्ता बनी रहती है। गत्ते के डिब्बों में वेंटिलेशन छिद्र, पेपर कुशनिंग तथा नेट पैकिंग का उपयोग अत्यंत लाभकारी पाया गया है।

किसानों के लिए महत्वपूर्ण संदेश

आम की सफल तुड़ाई केवल फल तोड़ने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक पूर्ण वैज्ञानिक प्रक्रिया है। सही परिपक्व अवस्था में तुड़ाई, रोग प्रबंधन, डंठल रस नियंत्रण, सुरक्षित धुलाई, वैज्ञानिक पकाने की तकनीक और आधुनिक पैकेजिंग- ये सभी उपाय मिलकर फलों की गुणवत्ता, शेल्फ लाइफ और बाजार मूल्य को बढ़ाते हैं।

यदि किसान तुड़ाई पूर्व इन वैज्ञानिक सावधानियों को अपनाएँ, तो न केवल फलों की खराबी कम होगी बल्कि घरेलू एवं निर्यात बाजारों में बेहतर कीमत प्राप्त कर अधिक लाभ अर्जित किया जा सकेगा।

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