आयात में सुस्ती, नई फसल की आवक में देरी और रुपय की कमजोरी के चलते हाल के दिनों में तूर यानी अरहर के भाव में हल्की मजबूती देखने को मिली है। व्यापारिक सूत्रों के अनुसार, कमजोर मुद्रा के कारण विदेशी आपूर्ति महंगी पड़ी है, जबकि घरेलू बाजार में ताजा माल की उपलब्धता सीमित बनी हुई है।
भारत दलहन एवं अनाज संघ यानी आईपीजीए के मुताबिक, महाराष्ट्र, कर्नाटक और तेलंगाना के प्रमुख बाजारों में नई तूर फसल के दाम 125 से 250 प्रति क्विंटल तक बढ़े हैं। पुरानी फसल के भाव में 100 से 200 प्रति क्विंटल की तेजी आई है, जबकि आयातित तूर 50 से 100 प्रति क्विंटल महंगी हुई है। हालांकि, आईपीजीए के अध्यक्ष बिमल कोठारी ने यह भी स्पष्ट किया कि यह बढ़त सीमित है और मौजूदा भाव अब भी न्यूनतम समर्थन मूल्य से नीचे बने हुए हैं।
आंकड़ों के अनुसार, जनवरी से नवंबर 2025 के दौरान तूर का आयात सालाना आधार पर 8 प्रतिशत घटकर 10.55 लाख टन रह गया है, जिससे बाजार में आवक का दबाव कुछ कम हुआ है। घरेलू फसल बेहतर रहने की उम्मीद में दाल मिलों और व्यापारियों ने पहले ही अपने अधिकांश स्टॉक खपा दिए थे, जिसके चलते आपूर्ति श्रृंखला फिलहाल पतली बनी हुई है।
अफ्रीकी देशों से तूर की आवक लगभग समाप्त हो चुकी है, जबकि म्यांमार से आयात फरवरी-मार्च के दौरान बढ़ने की संभावना जताई जा रही है। इस बीच, केंद्रीय कृषि मंत्रालय ने 2025-26 के लिए तूर उत्पादन का अनुमान 35.97 लाख टन लगाया है, जो पिछले वर्ष के 36.24 लाख टन से थोड़ा कम है। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि नई आवक तेज होने और आयात बढ़ने तक कीमतों में सीमित दायरे में ही उतार-चढ़ाव बना रह सकता है।
यह भी पढ़े: दक्षिण अमेरिका से आपूर्ति बढ़ने से वैश्विक तिलहन बाजार में नरमी..!
जागरूक रहिए व नुकसान से बचिए और अन्य लोगों के जागरूकता के लिए साझा करें एवं कृषि जागृति, स्वास्थ्य सामग्री, सरकारी योजनाएं, कृषि तकनीक, व्यवसायिक एवं जैविक खेती से संबंधित जानकारियां प्राप्त करने के लिए जुड़े कृषि जागृति चलो गांव की ओर से या कृषि संबंधित किसी भी समस्या के जैविक समाधान के लिए WhatsApp करें।