दक्षिण अमेरिका से बंपर आपूर्ति और दुनिया के सबसे बड़े आयातक चीन की कमजोर मांग के चलते अंतरराष्ट्रीय तिलहन बाजारों में भारी मंदी का माहौल बन गया है। अंतरराष्ट्रीय अनाज परिषद (IGC) और अमेरिकी कृषि विभाग (USDA) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, नवंबर के बाद से वैश्विक स्तर पर सोयाबीन के निर्यात भावों में तेज गिरावट आई है। ब्राजील और अर्जेंटीना में समय से पहले शुरू हुई कटाई और रिकॉर्ड उत्पादन से अंतरराष्ट्रीय भाव $400 प्रति टन तक गिर चुके हैं। जानिए USDA द्वारा वैश्विक उत्पादन का अनुमान बढ़ाकर रिकॉर्ड 4,257 लाख टन किए जाने का भारतीय मंडियों और किसानों पर क्या असर पड़ेगा।
वैश्विक तिलहन बाजारों पर दबाव
दक्षिण अमेरिका से रिकॉर्ड आपूर्ति की संभावनाओं और प्रमुख आयातकों की कमजोर मांग के बीच 2025 के अंत और 2026 की शुरुआत में वैश्विक तिलहन बाजारों पर दबाव साफ दिखाई दे रहा है। अंतरराष्ट्रीय अनाज परिषद आईजीसी के अनुसार, नवंबर के अंत के बाद से सोयाबीन के औसत वैश्विक निर्यात भाव में तेज गिरावट दर्ज की गई है, जिसमें सबसे ज्यादा कमजोरी दक्षिणी गोलार्ध के निर्यातक देशों में देखी गई।
ब्राजील में रिकॉर्ड फसल और भावों में 10% की गिरावट
ब्राज़ील में अनुकूल मौसम और समय से पहले शुरू हुई कटाई ने रिकॉर्ड फसल की उम्मीदों को और मजबूत किया है। वहीं चीन की ओर से अपेक्षाकृत सुस्त खरीदारी ने बाजार धारणा को नकारात्मक बनाए रखा है। इसका असर कीमतों पर साफ दिखा है। अमेरिकी खाड़ी क्षेत्र यानी यूएस गल्फ से सोयाबीन के निर्यात भाव लगभग 6 प्रतिशत गिरकर करीब 425 डॉलर प्रति टन पर आ गए हैं। वहीं ब्राज़ील और अर्जेंटीना से आपूर्ति वाले भाव करीब 10 प्रतिशत टूटकर क्रमशः 405 डॉलर और 400 डॉलर प्रति टन के आसपास पहुंच गए हैं।
USDA का रिकॉर्ड उत्पादन अनुमान
सोयाबीन के साथ-साथ अन्य तिलहनों में भी कमजोरी का यही रुझान रहा। कैनोला और वनस्पति तेलों की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में भी नरमी दर्ज की गई है, जिससे तिलहन परिसर में व्यापक दबाव बना हुआ है। आपूर्ति पक्ष से दबाव को और बढ़ाते हुए अमेरिकी कृषि विभाग यूएसडीए ने 2025-26 के लिए वैश्विक सोयाबीन उत्पादन का अनुमान बढ़ाकर रिकॉर्ड 4257 लाख टन कर दिया है। इस संशोधन में ब्राज़ील और अमेरिका में उत्पादन बढ़ने की प्रमुख भूमिका बताई गई है।
सोयाबीन और तिलहन बाजार में मंदी के 3 सबसे बड़े कारण
दक्षिण अमेरिका में रिकॉर्ड बंपर फसल: ब्राजील में अनुकूल मौसम के चलते कटाई समय से पहले शुरू हो गई है। रिकॉर्ड उत्पादन के कारण ब्राजील और अर्जेंटीना के निर्यातक आक्रामक रूप से सस्ते दामों पर माल बेच रहे हैं।
चीन की सुस्त खरीदारी: दुनिया का सबसे बड़ा सोयाबीन आयातक चीन अपेक्षाकृत धीमी खरीदारी कर रहा है। मांग कमजोर होने और आपूर्ति अधिक होने से अंतरराष्ट्रीय कीमतों में गिरावट आ रही है।
USDA द्वारा उत्पादन अनुमान में भारी बढ़ोतरी: अमेरिकी कृषि विभाग ने 2025-26 के लिए वैश्विक उत्पादन का अनुमान बढ़ाकर 4,257 लाख टन (लगभग 42.57 करोड़ टन) कर दिया है, जिससे वैश्विक स्तर पर तिलहनों का भारी अधिशेष (Surplus) बन गया है।
निष्कर्ष: वैश्विक तिलहन बाजार का यह चक्रव्यूह स्पष्ट संकेत देता है कि जब तक दक्षिण अमेरिका की बंपर फसल खप नहीं जाती और चीन की ओर से आक्रामक मांग नहीं निकलती, तब तक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सोयाबीन और वनस्पति तेलों में बड़ा उछाल आना मुश्किल है। अमेरिकी कृषि विभाग द्वारा 4,257 लाख टन के ऐतिहासिक उत्पादन का अनुमान इस बात की पुष्टि करता है कि दुनिया भर में तिलहन का भरपूर स्टॉक मौजूद है।
ऐसे में भारत के सोयाबीन उत्पादक किसानों को बाजार के उतार-चढ़ाव और सरकारी नीतियों (जैसे आयात शुल्क और एमएसपी खरीद) पर नजर रखते हुए ही अपनी फसल को टुकड़ों में मंडी में लाने की समझदारी दिखानी होगी।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
Q1. अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोयाबीन के निर्यात भाव कितने गिर गए हैं?
उत्तर: अंतरराष्ट्रीय अनाज परिषद (IGC) के अनुसार, यूएस गल्फ से सोयाबीन के भाव लगभग 6% गिरकर $425 प्रति टन, और ब्राजील व अर्जेंटीना में लगभग 10% टूटकर $400 से $405 प्रति टन के आसपास आ गए हैं।
Q2. ब्राजील और अर्जेंटीना में सोयाबीन के दाम तेजी से क्यों गिरे?
उत्तर: अनुकूल मौसम के कारण ब्राजील में कटाई समय से पहले शुरू हो गई है और वहां रिकॉर्ड फसल का अनुमान है, जिससे दक्षिणी गोलार्ध से भारी आपूर्ति बाजार में आ गई है।
Q3. USDA ने वर्ष 2025-26 के लिए वैश्विक सोयाबीन उत्पादन का क्या अनुमान लगाया है?
उत्तर: अमेरिकी कृषि विभाग (USDA) ने वैश्विक सोयाबीन उत्पादन का अनुमान बढ़ाकर रिकॉर्ड 4,257 लाख टन (42.57 करोड़ टन) कर दिया है।
Q4. क्या इस वैश्विक मंदी का असर अन्य खाद्य तेलों पर भी पड़ा है?
उत्तर: हाँ, सोयाबीन के साथ-साथ कैनोला और अंतरराष्ट्रीय वनस्पति तेलों (पाम ऑयल और सोया तेल) की कीमतों में भी व्यापक नरमी दर्ज की गई है।
Q5. इस वैश्विक गिरावट का भारतीय सोयाबीन उत्पादक किसानों पर क्या असर पड़ेगा?
उत्तर: अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सोयाबीन और खाद्य तेल सस्ते होने से आयातित तेलों का दबाव घरेलू बाजार पर बना रहता है, जिससे भारतीय मंडियों में सोयाबीन के भावों में बड़ी तेजी आने की संभावना सीमित हो जाती है।
यह भी पढ़े: USDA का अनुमान: भारत में चीनी उत्पादन 14% घटकर 2.95 करोड़ टन रहेगा, खपत से 13 लाख टन कम
जागरूक रहिए व नुकसान से बचिए और अन्य लोगों के जागरूकता के लिए साझा करें एवं कृषि जागृति, स्वास्थ्य सामग्री, सरकारी योजनाएं, कृषि तकनीक, व्यवसायिक एवं जैविक खेती से संबंधित जानकारियां प्राप्त करने के लिए जुड़े कृषि जागृति चलो गांव की ओर से या कृषि संबंधित किसी भी समस्या के जैविक समाधान के लिए WhatsApp करें।
जागरूक रहें और नुकसान से बचें! इसे अन्य किसान भाइयों की जागरूकता के लिए अवश्य साझा करें। कृषि लेख, सरकारी योजनाएं, कृषि तकनीक, व्यावसायिक एवं जैविक खेती से संबंधित सटीक जानकारियां प्राप्त करने के लिए कृषि जागृति से जुड़ें। खेती से जुड़ी किसी भी समस्या के समाधान के लिए सीधे WhatsApp करें।
कृषि जागृति-Krishi Jagriti भारतीय किसानों को समर्पित एक स्वतंत्र डिजिटल कृषि समाचार मंच है। हमारी संपादकीय टीम का उद्देश्य किसानों तक नवीनतम कृषि लेख, सरकारी योजनाएं, उन्नत कृषि तकनीक, बाजार भाव और जैविक खेती से संबंधित सटीक व उपयोगी जानकारियों का प्रसारण करना है। हम ग्रामीण अर्थव्यवस्था और किसानों के जीवन में सकारात्मक सुधार लाने के लिए निरंतर प्रयासरत हैं।
