देश में ग्रीष्मकालीन फसलों की बुवाई इस वर्ष तेज रफ्तार से आगे बढ़ रही है। केंद्रीय कृषि मंत्रालय के अनुसार 20 मार्च तक कुल बुवाई क्षेत्र 42 लाख हेक्टेयर से अधिक पहुंच चुका है, जो पिछले वर्ष की तुलना में करीब 15 लाख हेक्टेयर ज्यादा है।
इस सीजन में धान की बुवाई का दबदबा बना हुआ है, जहां 27 लाख हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र कवर किया गया है। दलहनों का रकबा भी बढ़कर करीब 4 लाख हेक्टेयर हो गया है, जो पिछले साल के 3.47 लाख हेक्टेयर से अधिक है। वहीं मोटे अनाज (श्री अन्न) और अन्य अनाजों की बुवाई लगभग 6 लाख हेक्टेयर में की गई है। तिलहनों का रकबा भी बढ़कर 4.69 लाख हेक्टेयर के पार पहुंच चुका है।
विशेषज्ञों के अनुसार यह बढ़ोतरी फसल विविधीकरण, बेहतर कृषि प्रबंधन और अनुकूल मौसम का परिणाम है। बढ़ा हुआ रकबा आने वाले समय में उत्पादन को मजबूती दे सकता है, जिससे किसानों की आय और बाजार आपूर्ति दोनों को सहारा मिलने की उम्मीद है।
निष्कर्ष के तौर पर देखें तो, 42 लाख हेक्टेयर से ज्यादा की यह बुवाई न केवल मानसून से पहले की एक बड़ी उपलब्धि है, बल्कि यह देश के खाद्य भंडार को मजबूत करने में भी अहम भूमिका निभाएगी। यदि मौसम इसी तरह साथ देता रहा, तो इस साल जायद की फसलों से उत्पादन के नए रिकॉर्ड बन सकते हैं, जिससे किसानों की आय में भी उल्लेखनीय वृद्धि होगी।
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