पराली जलाने पर हरियाणा में सख्ती; FIR के साथ सरकारी रिकॉर्ड में होगी ‘रेड एंट्री’, जानें नए नियम

गेहूं की कटाई के बाद अवशेष यानी फसलों के पराली जलाने पर अब सख्त कार्रवाई लागू कर दी गई है। पानीपत सहित पूरे हरियाणा में कृषि विभाग ने निगरानी बढ़ा दी है और नियम तोड़ने वालों पर जुर्माना, FIR और सरकारी रिकॉर्ड में रेड एंट्री तक की कार्रवाई की जा रही है।

वर्तमान व्यवस्था के तहत 67 फील्ड अफसर तैनात किए गए हैं और लगभग 1000 एकड़ क्षेत्र पर एक अधिकारी निगरानी कर रहा है। गांव स्तर पर टीमें सक्रिय हैं और सैटेलाइट के माध्यम से भी नजर रखी जा रही है। दिन हो या रात, अवशेष जलाने की घटना छुपाना अब संभव नहीं है। राज्य में रेड और यलो जोन की स्थिति भी लगातार मॉनिटर की जा रही है।

अभी केवल 3 गांव रेड जोन में और 145 गांव यलो जोन में हैं। पिछले साल 14 गांव रेड जोन में थे, जो अब घटकर 3 रह गए हैं, जिससे साफ है कि सख्ती का असर दिख रहा है। नियमों के अनुसार यदि कोई किसान अवशेष जलाते हुए पाया जाता है तो उस पर ₹15,000 या उससे अधिक का जुर्माना लगाया जा सकता है।

इसके साथ FIR दर्ज होने और सरकारी रिकॉर्ड में रेड एंट्री होने से भविष्य में सरकारी योजनाओं का लाभ लेने में भी परेशानी आ सकती है। किसानों के लिए बेहतर विकल्प मौजूद हैं। अवशेष जलाने के बजाय हैप्पी सीडर, मल्चर या रोटावेटर जैसी मशीनों का उपयोग करके पराली को मिट्टी में मिलाया जा सकता है।

इससे मिट्टी की उर्वरता भी बढ़ती है और पर्यावरण को नुकसान भी नहीं होता। किसान साथियों यह समझना जरूरी है कि अवशेष जलाने से न केवल कानूनी जोखिम बढ़ता है बल्कि मिट्टी के लाभकारी जीवाणु भी नष्ट होते हैं, जिससे आने वाली फसल की पैदावार प्रभावित होती है। इसलिए दीर्घकालिक लाभ के लिए वैकल्पिक तरीकों को अपनाना ही बेहतर निर्णय है।

निष्कर्ष- फसल अवशेषों को जलाना न केवल कानूनी दंड, भारी जुर्माने और ‘रेड एंट्री’ जैसे गंभीर परिणामों को बुलावा देना है, बल्कि यह हमारी धरती की उपजाऊ शक्ति का दम घोटने के समान भी है। हरियाणा सरकार और कृषि विभाग की मुस्तैदी यह साफ करती है कि अब पराली प्रबंधन में लापरवाही की कोई गुंजाइश नहीं है।

समझदारी इसी में है कि हम आधुनिक कृषि यंत्रों- हैप्पी सीडर और मल्चर को अपनाकर अवशेषों को मिट्टी का “पोषण” बनाएँ, न कि उन्हें “धुआं” बनाकर अपना भविष्य अंधकारमय करें। सही चुनाव ही हमें जुर्माने के डर से मुक्त कर एक समृद्ध और स्वस्थ कृषि की ओर ले जाएगा।

यह भी पढ़े: उज्जैन के किसानों पर भारी पड़ी पोर्टल की ये बड़ी गलती, 80 क्विंटल की पात्रता, मैसेज 2 क्विंटल का

जागरूक रहिए व नुकसान से बचिए और अन्य लोगों के जागरूकता के लिए साझा करें। कृषि लेख, सरकारी योजनाएं, कृषि तकनीक, व्यवसायिक एवं जैविक खेती से संबंधित सटीक जानकारियां प्राप्त करने के लिए जुड़े कृषि जागृति चलो गांव की ओर से या कृषि संबंधित किसी भी समस्या के जैविक समाधान के लिए WhatsApp करें।

Leave a Comment