सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एसईए) और एग्रीवॉच के आकलन के अनुसार वर्ष 2025-26 में भारत की अरंडी फसल का उत्पादन लगभग 11 प्रतिशत बढ़कर 17.6 लाख टन तक पहुंच सकता है। इस वृद्धि के पीछे प्रमुख उत्पादक राज्यों में बेहतर पैदावार और अनुकूल मौसम को मुख्य कारण माना जा रहा है।
देश में अरंडी का कुल रकबा लगभग 8.9 लाख हेक्टेयर रहने का अनुमान है, जो पिछले वर्ष के 8.68 लाख हेक्टेयर से करीब 3 प्रतिशत अधिक है। राष्ट्रीय औसत उत्पादकता 1,977 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर आंकी गई है, जो पिछले सीजन की तुलना में लगभग 8 प्रतिशत अधिक है। बेहतर मानसून, समय पर बुवाई और उच्च उत्पादक किस्मों के उपयोग ने उत्पादन वृद्धि में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
गुजरात देश का सबसे बड़ा अरंडी उत्पादक राज्य बना हुआ है। प्रदेश में अरंडी का रकबा थोड़ा घटकर लगभग 6.33 से 6.38 लाख हेक्टेयर रहने का अनुमान है, लेकिन बेहतर उत्पादकता के कारण उत्पादन बढ़कर 13.65 लाख टन तक पहुंच सकता है, जो पिछले वर्ष के 12.55 लाख टन से अधिक है। कच्छ, बनासकांठा और मेहसाणा जैसे जिलों में फसल की स्थिति अनुकूल बताई जा रही है।
राजस्थान में भी उत्पादन बढ़ने की संभावना है। यहां रकबा करीब 10 प्रतिशत बढ़कर 1.88 लाख हेक्टेयर हो गया है और उत्पादन 3.22 लाख टन रहने का अनुमान है, जो पिछले सीजन के 2.74 लाख टन से अधिक है। बाड़मेर, जालोर, सिरोही और जोधपुर जिलों में फसल की स्थिति संतोषजनक बताई गई है।
आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में कुल रकबा लगभग 37,995 हेक्टेयर रहने का अनुमान है और उत्पादन करीब 0.58 लाख टन रह सकता है, जो पिछले वर्ष के 0.54 लाख टन से थोड़ा अधिक है। कुल मिलाकर अनुकूल मौसम, बेहतर फसल प्रबंधन और सीमित कीट प्रकोप के कारण इस सीजन में देश की अरंडी फसल का परिदृश्य सकारात्मक दिखाई दे रहा है।
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