सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन के अनुसार, सरकार आनुवंशिक रूप से संशोधित जीएम यानी संकर सरसों किस्म को मंजूरी देने के बेहद करीब है। एसोसिएशन के अध्यक्ष संजीव अस्थाना ने अपने सदस्यों को लिखे पत्र में कहा कि यह प्रस्ताव व्यापक जैव-सुरक्षा परीक्षणों और बहु-स्थानिक फील्ड ट्रायल के बाद आगे बढ़ाया गया है।
अस्थाना के मुताबिक, इस जीएम सरसों किस्म में अधिक उपज, बेहतर रोग-प्रतिरोधक क्षमता और उच्च तेल रिकवरी जैसे प्रमुख गुणों पर विशेष ध्यान दिया गया है। यदि इसे अंतिम मंजूरी मिल जाती है, तो यह भारत में तिलहनों की लंबे समय से चली आ रही उत्पादकता की कमी को पाटने में मदद कर सकती है और खाद्य तेल आयात पर निर्भरता घटाने की दिशा में ठोस योगदान दे सकती है।
उन्होंने कहा कि यह पहल घरेलू तिलहन उत्पादन को मजबूत करने के लिए उन्नत तकनीकों को अपनाने की दिशा में एक सतर्क लेकिन प्रगतिशील बदलाव को दर्शाती है। एसोसिएशन का मानना है कि जीएम सरसों की शुरुआत से न केवल किसानों की आय बढ़ेगी, बल्कि तेल उद्योग को भी अधिक स्थिर और प्रतिस्पर्धी कच्चा माल आधार मिल सकेगा।
हालिया रिपोर्टों के अनुसार, सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में इसके पक्ष में मजबूत दलीलें दी हैं। सरकार का मानना है कि खाद्य सुरक्षा के लिए यह तकनीक जरूरी है। अगर इसे हरी झंडी मिलती है, तो भारत में बीटी कपास के बाद यह दूसरी जीएम फसल होगी जिसे अनुमति मिलेगी। जीएम सरसों विज्ञान और परंपरा के बीच की एक बड़ी बहस है।
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