मानसून पर मौसम विभाग की इस चेतावनी ने उड़ाई किसानों की नींद

देश में साल 2026 के मानसून को लेकर शुरुआती संकेतों ने किसानों और नीति निर्माताओं की चिंता बढ़ा दी है। भारतीय मौसम विभाग ने जून से सितंबर के दौरान होने वाली बारिश को दीर्घकालिक औसत के 92% पर रहने का अनुमान जताया है। पिछले एक दशक में यह पहला मौका है जब अप्रैल के महीने में ही विभाग ने इतने ‘कमजोर मानसून’ की चेतावनी जारी की है।

पृथ्वी विज्ञान सचिव एम. रविचंद्रन के अनुसार, इस साल मानसून के सामान्य से कम रहने की प्रबल संभावना है। यह खबर भारतीय कृषि क्षेत्र के लिए काफी संवेदनशील है क्योंकि देश का एक बड़ा हिस्सा अब भी अपनी सिंचाई के लिए पूरी तरह से मानसूनी बारिश पर निर्भर है। लगातार दो साल (2024 और 2025) बेहतर बारिश देखने के बाद यह गिरावट एक बड़ा बदलाव साबित हो सकती है।

मौसम वैज्ञानिकों ने इस कमजोर पूर्वानुमान के पीछे अल नीनो की संभावित वापसी को सबसे प्रमुख कारण बताया है। वर्तमान में प्रशांत महासागर की स्थिति ला नीना से न्यूट्रल की ओर बढ़ रही है, लेकिन मानसून के दूसरे हिस्से यानी अगस्त और सितंबर में अल नीनो के मजबूत होने की आशंका है। यह समय खरीफ फसलों के विकास के लिए बेहद महत्वपूर्ण होता है और इस दौरान बारिश की कमी उत्पादन को सीधे प्रभावित कर सकती है।

कृषि क्षेत्र के नजरिए से देखें तो वर्षा आधारित क्षेत्रों में बुवाई और फसल के बढ़ने के चरणों में पानी की कमी एक बड़ा जोखिम पैदा कर सकती है। इसके साथ ही, वैश्विक तनाव के चलते उर्वरक आपूर्ति में बनी अनिश्चितता इस संकट को और गहरा सकती है। मौसम विभाग मई में अपने अनुमानों को अपडेट करेगा, लेकिन फिलहाल शुरुआती संकेत यही कहते हैं कि इस साल प्रकृति किसानों का कड़ा इम्तिहान ले सकती है।

साल 2026 में मानसून के औसत से कम (92%) रहने का अनुमान भारतीय कृषि और अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ी चुनौती पेश कर सकता है। अल नीनो की संभावित वापसी और खरीफ फसलों के महत्वपूर्ण समय पर बारिश की कमी से उत्पादन प्रभावित होने का डर है, जो पिछले दो वर्षों की अच्छी बारिश के बाद एक चिंताजनक स्थिति है। ऐसे में नीति निर्माताओं और किसानों को अभी से जल प्रबंधन और वैकल्पिक कृषि रणनीतियों पर ध्यान देने की आवश्यकता होगी, ताकि इस प्राकृतिक अनिश्चितता के प्रभाव को कम किया जा सके।

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