यूपी में 6.18 लाख किसानों ने मांगा फसल बीमा मुआवजा, बुंदेलखंड में 26% फसलें तबाह; जानें सर्वे के नियम

उत्तर प्रदेश में बेमौसम बारिश और तेज आंधी के बाद खरीफ फसलों को हुए भारी नुकसान को लेकर प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) के तहत अब तक 6,18,327 बीमित किसानों ने नुकसान की आधिकारिक सूचना दर्ज कराई है। प्रदेश में पंजीकृत कुल 23.36 लाख बीमित किसानों में से 26 प्रतिशत से अधिक की फसलें प्रभावित हुई हैं, जिनमें बुंदेलखंड के ललितपुर, महोबा और झांसी जिले सबसे ज्यादा प्रभावित हैं।

कृषि विभाग और बीमा कंपनियों की संयुक्त टीमों ने खेतों में जाकर भौतिक सत्यापन शुरू कर दिया है। जानिए 72 घंटे के नियम, पिछले साल के ₹812 करोड़ के भुगतान रिकॉर्ड और बिना बीमा वाले किसानों के लिए 33% राहत का पूरा गणित।

6.18 लाख किसानों ने दर्ज कराया क्लेम

उत्तर प्रदेश में बेमौसम बारिश और तेज हवाओं से फसल नुकसान के बाद प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत 6,18,327 बीमित किसानों ने क्षति की सूचना दर्ज कराई है। खरीफ सीजन में पंजीकृत 23.36 लाख बीमित किसानों में से 26% से अधिक की फसलें प्रभावित हुई हैं। बुंदेलखंड के ललितपुर, महोबा और झांसी जिले सबसे अधिक प्रभावित बताए गए हैं।

खेतों में भौतिक सत्यापन शुरू

कृषि विभाग और बीमा कंपनियों की संयुक्त समितियों ने क्षतिपूर्ति दावों के भौतिक सत्यापन की प्रक्रिया शुरू कर दी है। योजना के तहत किसानों ने आपदा के 72 घंटे के भीतर टोल-फ्री नंबर और पोर्टल चैटबॉट के जरिए नुकसान की सूचना दी है।

₹812 करोड़ भुगतान और 33% राहत नियम

वर्ष 2025 में किसानों के 163 करोड़ रुपये के प्रीमियम अंशदान के मुकाबले 812 करोड़ रुपये के बीमा दावों का भुगतान किया गया था। जिन किसानों ने फसल बीमा नहीं कराया है, उन्हें राजस्व विभाग की आपदा राहत व्यवस्था के तहत सहायता मिल सकती है। इसके लिए 33% या उससे अधिक फसल नुकसान की शर्त है।

मुख्यमंत्री के निर्देश और राहत टीमें

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर कृषि और राजस्व विभाग की संयुक्त टीमें नुकसान का आकलन कर रही हैं। जरूरत पड़ने पर राष्ट्रीय आपदा मोचन निधि से अतिरिक्त सहायता भी मांगी जा सकती है।

फसल बीमा क्लेम के लिए किसानों को ध्यान रखने योग्य 3 मुख्य बातें

72 घंटे के भीतर सूचना अनिवार्य: आपदा आने के 72 घंटे के भीतर जिन किसानों ने टोल-फ्री नंबर या पोर्टल चैटबॉट पर शिकायत दर्ज करा दी है, उनके खेतों का सर्वे पहले प्राथमिकता पर किया जा रहा है।

भौतिक सत्यापन के समय खेत पर मौजूद रहें: कृषि विभाग और बीमा कंपनी की संयुक्त टीम जब सर्वे करने आए, तो किसान स्वयं मौजूद रहकर नुकसान का पंचनामा बनवाएं और उसकी पावती अपने पास रखें।

गैर-बीमित किसान लेखपाल से संपर्क करें: जिन किसानों ने फसल बीमा नहीं कराया है, वे मायूस न हों। यदि राजस्व विभाग के सर्वे में फसल नुकसान 33 प्रतिशत या उससे अधिक पाया जाता है, तो राज्य आपदा राहत कोष से आर्थिक सहायता मिलेगी।

निष्कर्ष: प्राकृतिक आपदाओं के समय प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना किसानों के लिए सबसे बड़ा सुरक्षा कवच साबित होती है। उत्तर प्रदेश में 6 लाख से अधिक किसानों द्वारा समय पर दर्ज कराई गई सूचना और प्रशासनिक टीमों द्वारा त्वरित भौतिक सत्यापन इस बात का प्रमाण है कि पारदर्शी व्यवस्था से अन्नदाता को संकट से उबारा जा सकता है।

सरकार को चाहिए कि बिना किसी बीमा कंपनी की हीलाहवाली के जल्द से जल्द सर्वे पूरा कराकर रबी बुवाई से पहले किसानों के बैंक खातों में क्लेम की राशि डीबीटी के माध्यम से भेजे, वहीं गैर-बीमित किसानों को भी 33% नुकसान के आधार पर तत्काल राहत प्रदान करे।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

Q1. उत्तर प्रदेश में कितने किसानों ने फसल बीमा क्लेम के लिए आवेदन किया है?

उत्तर: बेमौसम बारिश और आंधी के बाद प्रदेश के 6,18,327 बीमित किसानों ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत नुकसान की सूचना दर्ज कराई है।

Q2. यूपी के कौन-से जिले इस आपदा से सबसे अधिक प्रभावित हुए हैं?

उत्तर: बुंदेलखंड क्षेत्र के ललितपुर, महोबा और झांसी जिले सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं, जहां 26% से अधिक बीमित फसलें क्षतिग्रस्त हुई हैं।

Q3. नुकसान का सर्वे कौन और कैसे कर रहा है?

उत्तर: मुख्यमंत्री के निर्देश पर कृषि विभाग, राजस्व विभाग और बीमा कंपनियों की संयुक्त टीमें खेतों में जाकर नुकसान का भौतिक सत्यापन (Physical Verification) कर रही हैं।

Q4. क्या बिना बीमा वाले किसानों को भी कोई सरकारी मुआवजा मिलेगा?

उत्तर: हाँ, जिन किसानों ने बीमा नहीं कराया है, यदि उनकी फसल में 33% या उससे अधिक का नुकसान प्रमाणित होता है, तो उन्हें राजस्व विभाग के आपदा राहत कोष से सहायता दी जाएगी।

Q5. पिछले वर्ष उत्तर प्रदेश में फसल बीमा क्लेम का क्या रिकॉर्ड रहा था?

उत्तर: वर्ष 2025 में किसानों के 163 करोड़ रुपये के कुल प्रीमियम अंशदान के मुकाबले 812 करोड़ रुपये के बीमा दावों का सफल भुगतान किया गया था।

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