देश के जीरा बाजार में सप्ताह की शुरुआत काफी मजबूती के साथ हुई है। गुजरात और राजस्थान जैसे प्रमुख उत्पादक क्षेत्रों की मंडियों में इस समय जीरे की भारी आवक हो रही है। आम तौर पर ज्यादा आवक होने पर कीमतों में गिरावट आती है, लेकिन इस बार बाजार का रुख अलग है।
कीमतों का स्थिर रहना इस बात का प्रमाण है कि बाजार में घरेलू और निर्यात मांग बहुत मजबूत बनी हुई है। मंडियों में जीरे की सामान्य कीमतें फिलहाल 16,000 से 22,000 रुपये प्रति क्विंटल के दायरे में देखी जा रही हैं। हालांकि, जो माल उच्च गुणवत्ता और अच्छी ग्रेडिंग वाला है, उसके लिए व्यापारी इससे भी अधिक भाव देने को तैयार हैं।
यह स्पष्ट संकेत है कि किसान अगर अपनी उपज की सफाई और ग्रेडिंग पर ध्यान दें, तो उन्हें बाजार से काफी बेहतर मुनाफा मिल सकता है। गुजरात की हालवाड मंडी में इस समय सबसे बड़े व्यापारिक केंद्र के रूप में उभरी है। यहां 240 टन से अधिक जीरे की आवक दर्ज की गई है, फिर भी भाव 20,000 रुपय प्रति क्विंटल के स्तर पर मजबूती से टिके हुए हैं।
इसके अलावा राजकोट और कलवाड की मंडियों में भी कीमतें 19,000 से 19,750 रुपय के बीच स्थिर बनी हुई हैं, जहां मामूली उतार-चढ़ाव केवल गुणवत्ता के आधार पर देखा जा रहा है। राजस्थान की मंडियों में तो जीरे की कीमतों का रुख और भी ज्यादा सकारात्मक नजर आ रहा है। नागौर मंडी में 22,000 रुपय प्रति क्विंटल का उच्चतम मॉडल भाव दर्ज किया गया है।
वहीं, प्रीमियम गुणवत्ता वाले जीरे के लिए खरीदार 24,500 रुपय तक के दाम चुका रहे हैं। बाड़मेर और जोधपुर की मंडियों में भी बाजार काफी मजबूत बना हुआ है, हालांकि मालपुरा क्षेत्र में कीमतों में हल्की नरमी महसूस की गई। बाजार के जानकारों ने बताया कि भारी आवक के दबाव को बाजार बहुत आसानी से संभाल रहा है।
भारी आपूर्ति होने के बावजूद कीमतों का न गिरना यह दर्शाता है कि मांग का स्तर काफी ऊंचा है। फिलहाल बाजार की स्थिति को देखते हुए जीरे की कीमतों में किसी बड़ी गिरावट की संभावना नजर नहीं आ रही है, जो किसानों के लिए राहत की बात है। भारी आवक के बावजूद कीमतों में मजबूती बाजार की असाधारण मांग को दर्शाती है।
गुजरात और राजस्थान की प्रमुख मंडियों में ₹16,000 से लेकर ₹24,500 प्रति क्विंटल तक के भाव यह स्पष्ट करते हैं कि उच्च गुणवत्ता और बेहतर ग्रेडिंग वाले माल के लिए खरीदार प्रीमियम मूल्य देने को तैयार हैं। मांग और आपूर्ति का यह संतुलन संकेत देता है कि आने वाले समय में कीमतों में किसी बड़े सुधार या गिरावट की संभावना कम है, जिससे किसानों के लिए अपनी उपज को सही गुणवत्ता के साथ बाजार में लाकर अधिकतम लाभ कमाने का यह एक बेहतरीन अवसर है।
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