पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव ने न केवल ऊर्जा बाज़ार बल्कि वैश्विक रसोई के बजट को भी प्रभावित करना शुरू कर दिया है। संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन (एफएओ) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, मार्च महीने में खाद्य कीमतों में आई तेजी का सीधा संबंध कच्चे तेल की बढ़ती लागत से है। ऊर्जा की बढ़ती कीमतों ने न केवल कृषि उत्पादन और परिवहन की लागत बढ़ाई है, बल्कि जैव-ईंधन की मांग में भी इजाफा किया है, जिससे खाद्य बाज़ारो पर चौतरफा दबाव बन गया है।
मार्च में एफएओ का खाद्य मूल्य सूचकांक औसतन 128.5 अंक रहा, जो पिछले महीने की तुलना में 2.4 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है। हालांकि सालाना आधार पर यह वृद्धि फिलहाल सीमित है, लेकिन वनस्पति तेल और चीनी की कीमतों में आई भारी तेजी ने भविष्य के लिए खतरे की घंटी बजा दी है। वनस्पति तेल के दाम 5.1 प्रतिशत की छलांग लगाकर सालाना आधार पर 13 प्रतिशत ऊपर पहुँच गए हैं। वहीं, ब्राजील जैसे प्रमुख उत्पादकों द्वारा गन्ने का उपयोग चीनी के बजाय एथेनॉल बनाने में अधिक करने के कारण चीनी की वैश्विक कीमतों में 7.2 प्रतिशत का बड़ा उछाल आया है।
अनाज बाज़ार में भी इस दौरान मिला-जुला असर देखा गया है, जहाँ गेहूं की कीमतों में 4.3 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। अमेरिका में सूखे की स्थिति और ऑस्ट्रेलिया में बुवाई क्षेत्र में आई कमी ने इस उछाल को हवा दी है। इसके विपरीत, वैश्विक स्तर पर कमजोर मांग के चलते चावल की कीमतों में 3 प्रतिशत की गिरावट देखी गई है, जो उपभोक्ताओं के लिए थोड़ी राहत की बात है। उत्पादन के मोर्चे पर सुखद पहलू यह है कि वर्ष 2025 के लिए कुल अनाज और चावल का उत्पादन रिकॉर्ड स्तर पर पहुँचने का अनुमान है, जो आपूर्ति को स्थिरता प्रदान कर सकता है।
हालांकि वैश्विक भंडार की स्थिति संतोषजनक दिख रही है, लेकिन एफएओ ने आगाह किया है कि महंगाई का खतरा अभी टला नहीं है। ऊर्जा और उर्वरक की लगातार बढ़ती लागत के साथ-साथ स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जैसे रणनीतिक समुद्री मार्गों पर संभावित आपूर्ति बाधाएं वैश्विक खाद्य सुरक्षा के लिए नई चुनौतियां पैदा कर सकती हैं। आने वाले समय में यदि ये माल-ढुलाई बाधाएं और इनपुट लागतें कम नहीं हुईं, तो उपभोक्ताओं को खाद्य महंगाई के एक नए और अधिक कठिन दौर का सामना करना पड़ सकता है।
यह भी पढ़े: भारतीय सीफूड का ग्लोबल जलवा: 10 साल में दोगुना हुआ निर्यात, झींगा बना ‘एक्सपोर्ट किंग’
जागरूक रहिए व नुकसान से बचिए और अन्य लोगों के जागरूकता के लिए साझा करें एवं कृषि जागृति, स्वास्थ्य सामग्री, सरकारी योजनाएं, कृषि तकनीक, व्यवसायिक एवं जैविक खेती से संबंधित जानकारियां प्राप्त करने के लिए जुड़े कृषि जागृति चलो गांव की ओर से या कृषि संबंधित किसी भी समस्या के जैविक समाधान के लिए WhatsApp करें।
