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यमन और मिस्र ने छीना भारत का प्याज बाजार! लासलगांव मंडी में भारी स्टॉक से कीमतें 50% घटीं

15/04/2026 by Anil Kumar Prasad

यमन और मिस्र ने छीना भारत का प्याज बाजार! लासलगांव मंडी में भारी स्टॉक से कीमतें 50% घटीं

पश्चिम एशिया के अशांत हालातों ने महाराष्ट्र के प्याज किसानों की मुश्किलों में जबरदस्त इजाफा कर दिया है। निर्यात में आई भारी गिरावट और लॉजिस्टिक्स लागत में हुई बेतहाशा बढ़ोतरी ने एशिया की सबसे बड़ी प्याज मंडी, लासलगांव में कीमतों को अर्श से फर्श पर ला दिया है। खाड़ी देशों को होने वाले निर्यात में लगभग 45% की बड़ी कमी देखी गई है, जिससे मंडियों में प्याज का स्टॉक बढ़ गया है और मांग कमजोर पड़ गई है।

निर्यात के इस संकट ने घरेलू बाजार में कीमतों को पिछले साल के मुकाबले लगभग आधा कर दिया है। वर्तमान में गर्मी की फसल का प्याज 1,500 रुपये प्रति क्विंटल और लाल प्याज 1,417 रुपये के आसपास बिक रहा है। इस मंदी की सबसे बड़ी वजह माल ढुलाई के खर्च में आया भारी उछाल है, जहाँ कंटेनर भाड़ा 600 से 700 डॉलर से बढ़कर सीधे 6,500 डॉलर के पार पहुँच गया है, जिससे भारतीय प्याज अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपनी चमक खो रहा है।

वैश्विक बाजार में भारत की इस चुनौती का फायदा उठाकर यमन और मिस्र जैसे देश सस्ते विकल्प के रूप में अपनी हिस्सेदारी तेजी से बढ़ा रहे हैं। घरेलू बाजार में प्याज की अधिक आपूर्ति और कीमतों में गिरावट को देखते हुए निर्यातकों ने केंद्र सरकार से हस्तक्षेप की मांग की है। उनकी मांग है कि निर्यात को फिर से प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए माल ढुलाई में आर्थिक मदद और कम से कम 10% निर्यात सब्सिडी दी जाए।

बाजार की मंदी के साथ-साथ कुदरत ने भी नासिक और आसपास के किसानों की परेशानी बढ़ा दी है। हाल ही में हुई बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि ने खड़ी फसल की गुणवत्ता को काफी प्रभावित किया है। ऐसे में किसान दोहरी मार झेल रहे हैं। एक तरफ फसल की क्वालिटी गिर रही है और दूसरी तरफ मंडियों में सही दाम नहीं मिल रहे हैं। इस स्थिति से निपटने के लिए अब व्यापारी रेल आधारित लॉजिस्टिक्स जैसे किफायती विकल्प तलाश रहे हैं।

निर्यात के आंकड़ों पर नजर डालें तो साल 2022-23 में जहाँ 25.25 लाख टन प्याज का निर्यात हुआ था, वह 2024-25 में सिमटकर 11.47 लाख टन रह गया। हालांकि इस साल जनवरी तक 12.83 लाख टन का व्यापार हुआ है, लेकिन बढ़ती वैश्विक लागत और मौसम की अनिश्चितता ने महाराष्ट्र के प्याज उत्पादकों के लिए आय का संकट गहरा कर दिया है।

यह भी पढ़े: भारतीय आमों के लिए खुले प्रीमियम बाजारों के दरवाजे; न्यूयॉर्क पहुंची हापुस की पहली खेप

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Filed Under: कृषि समाचार Tagged With: Agricultural News, Krishi Jagriti, Lasalgaon Mandi, Onion Export Crisis, Onion Price Drop

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About Anil Kumar Prasad

मेरा नाम Anil Kumar Prasad है। मैं पिछले 5 वर्षों से कृषि क्षेत्र से जुड़ा हूँ। मैं कृषि जागृति-Krishi Jagriti का संस्थापक हूँ। मेरा उद्देश्य भारतीय किसानों के जीवन सुधार हेतु स्वास्थ्य सामग्री, कृषि लेख, सरकारी योजनाएं, कृषि तकनीक, व्यवसायिक एवं जैविक खेती संबंधित जानकारियों का प्रसारण करना है।

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