रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मध्य प्रदेश के रायसेन में कहा कि अब भारतीय सेना के जवानों के लिए फल और सब्जियां दूर-दराज के इलाकों से मंगवाने की जरूरत नहीं होगी। इसके बजाय, सेना अब छावनी (कैंटोनमेंट) क्षेत्रों के आसपास रहने वाले स्थानीय किसानों से ही सीधे जैविक सब्जियां और फल खरीदेगी। राजनाथ सिंह ने किसानों को भारतीय अर्थव्यवस्था की असली रीढ़ बताया।
उन्होंने कहा कि एक किसान केवल अन्न ही नहीं उगाता, बल्कि वह देश के रोजगार, उद्योगों और सेवाओं को भी खाद-पानी देकर सींचता है। सरकार का मुख्य लक्ष्य सम्मान निधि और फसल बीमा जैसी योजनाओं के जरिए किसानों के जीवन में सम्मान, सुरक्षा और समृद्धि लाना है। रक्षा मंत्री ने कहा कि सेना के राशन में अब ‘श्री-अन्न’ यानी मोटे अनाज को प्रमुखता दी जा रही है।
पिछले कुछ वर्षों में सेनाओं के लिए ज्वार, बाजरा और रागी के आटे की उपलब्धता सुनिश्चित की गई है। इस पहल से पारंपरिक अनाज उगाने वाले किसानों को सीधे तौर पर आर्थिक लाभ मिल रहा है। उन्होंने कहा कि देश भर की मंडियों को ऑनलाइन जोड़ने से किसानों को अपनी उपज कहीं भी बेचने की आजादी मिली है। न्यूनतम समर्थन मूल्य को बढ़ावा देना और मंडियों को आधुनिक बनाना सरकार की प्राथमिकता रही है। इन प्रयासों ने खेती-किसानी के पारंपरिक ढांचे में बड़े और सकारात्मक बदलाव किए हैं।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की यह घोषणा स्थानीय अर्थव्यवस्था और सैन्य दक्षता के बीच एक मजबूत सेतु का काम करेगी। सेना द्वारा छावनी क्षेत्रों के पास के किसानों से सीधे फल-सब्जियों और ‘श्री-अन्न’ (मोटे अनाज) की खरीद करने से न केवल जवानों को ताज़ा और जैविक आहार मिलेगा, बल्कि बिचौलियों की समाप्ति से किसानों की आय और समृद्धि में भी वृद्धि होगी। यह पहल डिजिटल मंडियों और कल्याणकारी योजनाओं के साथ मिलकर कृषि क्षेत्र के आधुनिकीकरण और आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को और अधिक सुदृढ़ करती है।
यह भी पढ़े: गन्ने की खेती में ‘चौड़ी कतार’ तकनीक से निर्मल सिंह कमा रहे बंपर मुनाफा
जागरूक रहिए व नुकसान से बचिए और अन्य लोगों के जागरूकता के लिए साझा करें। स्वास्थ्य सामग्री, कृषि लेख, सरकारी योजनाएं, कृषि तकनीक, व्यवसायिक एवं जैविक खेती से संबंधित सटीक जानकारियां प्राप्त करने के लिए जुड़े कृषि जागृति चलो गांव की ओर से या कृषि संबंधित किसी भी समस्या के जैविक समाधान के लिए WhatsApp करें।
