गुजरात के विश्व प्रसिद्ध ‘गिर केसर’ आम के नए सीजन की शुरुआत के साथ ही अंतरराष्ट्रीय बाजारों में इसकी भारी मांग देखी जा रही है। घरेलू बाजार और विदेशों में मिलने वाली कीमतों के बीच का भारी अंतर इस बार निर्यात की संभावनाओं को नई ऊंचाइयों पर ले जा रहा है।
जूनागढ़ की स्थानीय मंडियों में केसर आम का 10 किलो का बॉक्स वर्तमान में 1,200 से 1,500 रुपय के बीच बिक रहा है। इसके उलट, अमेरिका, ब्रिटेन, कतर, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में यही आम 25 से 30 डॉलर प्रति दर्जन की खुदरा कीमत पर बिक रहा है।
इस जबरदस्त मुनाफे को देखते हुए निर्यात गतिविधियों में तेजी आई है। अब तक सौराष्ट्र के सोरठ क्षेत्र के 675 किसानों ने ‘अपेडा’ के साथ अपना पंजीकरण कराया है। इनमें जूनागढ़ और गिर सोमनाथ के 81 प्रगतिशील किसान शामिल हैं।
यह पंजीकरण प्रक्रिया मई के अंत तक जारी रहेगी। सोरठ क्षेत्र के लगभग 29,000 हेक्टेयर में फैले बागों ने पिछले साल 97 लाख टन आम का उत्पादन किया था। यहाँ की औसत उत्पादकता 7 टन प्रति हेक्टेयर रही है, जो इस क्षेत्र की कृषि कुशलता को दर्शाती है। पिछले सीजन में गुजरात ने कुल 689 टन आम का निर्यात किया था।
अहमदाबाद, वडोदरा, सूरत और मुंबई इस निर्यात के प्रमुख केंद्र बनकर उभरे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि बेहतर लॉजिस्टिक्स और गुणवत्ता मानकों के पालन से किसान इस बड़े मूल्य अंतर का लाभ उठा सकते हैं।
केसर आम इस साल बागवानी निर्यात को नई रफ्तार देने वाला मुख्य उत्पाद साबित होगा। गुजरात का ‘गिर केसर’ आम न केवल अपनी मिठास के लिए प्रसिद्ध है, बल्कि अब यह अंतरराष्ट्रीय बाजार में एक प्रीमियम ब्रांड के रूप में स्थापित हो चुका है। घरेलू और विदेशी कीमतों के बीच का भारी अंतर (25 से 30 डॉलर प्रति दर्जन) किसानों के लिए मुनाफे के नए द्वार खोल रहा है।
जिससे प्रेरित होकर बड़ी संख्या में बागवान ‘अपेडा’ के साथ पंजीकरण करा रहे हैं। बेहतर लॉजिस्टिक्स और वैश्विक गुणवत्ता मानकों को अपनाकर, यह फल न केवल गुजरात के निर्यात क्षेत्र को मजबूती प्रदान कर रहा है, बल्कि भारतीय बागवानी को वैश्विक पटल पर एक नई पहचान और आर्थिक समृद्धि भी दिला रहा है।
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