मत्स्य निर्यात में भारत की ‘महा-छलांग’: ₹68,000 करोड़ का आंकड़ा पार

भारत का कुल मत्स्य निर्यात मूल्य करीब 60,000 करोड़ से उछलकर अब 68,000 करोड़ के प्रभावशाली स्तर तक पहुंच गया है। यह बड़ी कामयाबी मुख्य रूप से नए वैश्विक बाजारों की खोज और व्यापार में लाए गए विविधीकरण की वजह से संभव हुई है।

केंद्रीय मत्स्य राज्य मंत्री सत्य पाल सिंह बघेल ने नागपुर में आयोजित एक राष्ट्रीय संगोष्ठी के दौरान बताया कि अमेरिका में टैरिफ से जुड़ी चुनौतियों के बाद भारत ने रणनीतिक रूप से अपने निर्यात बाजारों का विस्तार किया।

इसी दूरगामी सोच का नतीजा है कि आज भारत झींगा, टूना और अन्य समुद्री उत्पादों का बड़े पैमाने पर निर्यात यूरोप, लैटिन अमेरिका, मध्य पूर्व और एशिया के कई नए देशों को कर रहा है। उत्पादन के मोर्चे पर आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु और ओडिशा जैसे राज्य अपनी प्रमुख भूमिका निभा रहे हैं।

वहीं, लक्षद्वीप और अंडमान-निकोबार जैसे द्वीपीय क्षेत्र भी इस क्षेत्र की मजबूती का मुख्य आधार बनकर उभरे हैं। सक्रिय बाजार रणनीति के कारण ही आज भारतीय समुद्री उत्पाद दुनिया भर की थालियों तक पहुंच रहे हैं, जिससे विदेशी मुद्रा भंडार में भी इजाफा हो रहा है। मंत्री बघेल ने बताया कि सरकार ने अब अगले पांच वर्षों के लिए एक और बड़ा लक्ष्य निर्धारित किया है।

केंद्र का उद्देश्य मत्स्य निर्यात को 1 लाख करोड़ रुपए के पार ले जाना है। इस ऊंचे लक्ष्य को पाने के लिए केवल मात्रा बढ़ाने पर ही नहीं, बल्कि उत्पादों के मूल्य वर्धन और एक बेहद मजबूत आपूर्ति श्रृंखला तैयार करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। भारत का मत्स्य निर्यात क्षेत्र एक बड़े बदलाव के दौर से गुजर रहा है, जहाँ 68,000 करोड़ रुपय की उपलब्धि केवल एक शुरुआत है।

अमेरिका जैसे पारंपरिक बाजारों की चुनौतियों के बावजूद, सरकार की बाजार विविधीकरण रणनीति और तटीय राज्यों के सक्रिय योगदान ने देश को एक नई मजबूती दी है। अब 1 लाख करोड़ रुपय के महत्वाकांक्षी लक्ष्य की ओर बढ़ते हुए, भारत केवल उत्पादन बढ़ाने पर ही नहीं, बल्कि वैल्यू एडिशन (मूल्य वर्धन) और मजबूत सप्लाई चेन पर ध्यान केंद्रित कर रहा है, जो इसे वैश्विक समुद्री उत्पाद बाजार में एक निर्णायक शक्ति के रूप में स्थापित करेगा।

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