देश में 274 लाख टन चीनी तैयार; पिछले साल का रिकॉर्ड टूटा, महाराष्ट्र ने गाड़े झंडे

भारत में चीनी उत्पादन इस बार मिठास की नई ऊंचाइयां छू रहा है। नेशनल फेडरेशन ऑफ कोऑपरेटिव शुगर फैक्ट्री लिमिटेड की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, 2025-26 सीजन के दौरान उत्पादन अब तक 273.9 लाख टन के प्रभावशाली स्तर पर पहुंच गया है।

पिछले साल इसी समय तक उत्पादन 254.3 लाख टन था, जिसका सीधा मतलब है कि इस बार उत्पादन में लगभग 8 प्रतिशत की शानदार बढ़त दर्ज की गई है।इस साल की इस बड़ी उपलब्धि के पीछे महाराष्ट्र का सबसे बड़ा हाथ है। देश के इस अग्रणी उत्पादक राज्य में चीनी का उत्पादन पिछले साल के 80.6 लाख टन से 23 प्रतिशत उछलकर 99.2 लाख टन हो गया है।

महाराष्ट्र के साथ-साथ कर्नाटक ने भी अच्छा प्रदर्शन किया है, जहां उत्पादन में 17 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई है। इन दोनों राज्यों के शानदार प्रदर्शन ने राष्ट्रीय स्तर पर आंकड़ों को काफी मजबूती दी है। हालांकि, महाराष्ट्र और कर्नाटक की तुलना में उत्तर प्रदेश की स्थिति थोड़ी अलग रही है।

देश का यह दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक राज्य पिछले साल के 91 लाख टन के मुकाबले इस बार 89.2 लाख टन पर ही रुक गया।उत्पादन में आई यह हल्की गिरावट क्षेत्र विशेष में गन्ने की उपलब्धता और उससे निकलने वाली चीनी की मात्रा में आए अंतर को साफ तौर पर दर्शाती है।

एक और महत्वपूर्ण बात यह है कि इस सीजन का अब तक का उत्पादन पिछले साल के पूरे सीजन के कुल उत्पादन (262 लाख टन) को पहले ही पार कर चुका है। सीजन अब अपने समापन की ओर बढ़ रहा है, क्योंकि देश की कुल 541 चीनी मिलों में से 520 मिलें पेराई का काम पूरा कर बंद हो चुकी हैं।

फिलहाल केवल 21 मिलें ही चल रही हैं, जो मुख्य रूप से तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश और हरियाणा में स्थित हैं। सीजन के अंतिम आंकड़ों में अभी और सुधार होने की गुंजाइश है, क्योंकि दक्षिण भारत के तमिलनाडु और कर्नाटक में अगस्त-सितंबर में पेराई का दूसरा चरण शुरू होगा।

इससे उत्पादन के आंकड़ों में और इजाफा होने की पूरी संभावना है। कुल मिलाकर, देश में चीनी उत्पादन का परिदृश्य काफी सकारात्मक है, हालांकि अंतिम नतीजे दक्षिणी राज्यों के आगामी उत्पादन और क्षेत्रीय अंतर पर ही टिके होंगे।

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