गेहूं खरीद में पंजाब-हरियाणा निकले आगे, मध्य प्रदेश में गेहूं खरीद सुस्त

देश में 2026-27 रबी विपणन सीजन के तहत गेहूं खरीद की प्रक्रिया लगभग अपने लक्ष्य के करीब पहुंच चुकी है। हालांकि, कुल खरीद के आंकड़े अब भी पिछले साल की तुलना में पीछे चल रहे हैं। भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) के ताजा आंकड़ों के अनुसार, 30 अप्रैल तक देश भर में कुल 232.5 लाख टन गेहूं की खरीद हुई है।

वहीं, पिछले साल इसी समान अवधि में यह आंकड़ा 256.3 लाख टन दर्ज किया गया था। मध्य प्रदेश में पिछले साल हुई 67.7 लाख टन खरीद की तुलना में करीब 59 प्रतिशत कम है। इस भारी गिरावट के बावजूद, देश की कुल खरीद केंद्र सरकार के 345 लाख टन के लक्ष्य का लगभग 97 प्रतिशत हिस्सा पूरा कर चुकी है। पंजाब और हरियाणा की मंडियों में गेहूं की आवक घटने के स्पष्ट संकेत मिलने लगे हैं। इन संकेतों से यह अंदाजा लगाया जा रहा है कि खरीद की यह पूरी प्रक्रिया मई के मध्य तक समाप्त हो सकती है।

खरीद में पंजाब ने शानदार प्रदर्शन करते हुए गेहूं खरीद में 7 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की है और यह 111 लाख टन के साथ अपने निर्धारित लक्ष्य के बिल्कुल करीब है। इसी तरह, हरियाणा ने भी सरकार की अपेक्षा से काफी बेहतर प्रदर्शन किया है। इस राज्य ने 76.6 लाख टन खरीद दर्ज की है, जो साल-दर-साल के हिसाब से 17 प्रतिशत अधिक है। हालांकि, मध्य प्रदेश में शुरुआत में हुई देरी के कारण गेहूं की खरीद बुरी तरह प्रभावित रही है।

इस कमी को दूर करने के लिए राज्य का खरीद लक्ष्य बढ़ाकर 100 लाख टन कर दिया गया है। मध्य प्रदेश में खरीद को बढ़ावा देने और किसानों को आकर्षित करने के लिए 2,585 रुपय प्रति क्विंटल के न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी एमएसपी के ऊपर अतिरिक्त बोनस भी दिया जा रहा है। देश के अन्य प्रमुख उत्पादक राज्यों में खरीद अपेक्षाकृत कम ही रही है।

उत्तर प्रदेश में केवल 7.12 लाख टन और राजस्थान में 9.76 लाख टन गेहूं की खरीद हो पाई है, जो पिछले साल के मुकाबले कम है। दूसरी ओर, बिहार के खरीद आंकड़ों में 36 प्रतिशत की उत्साहजनक बढ़त दर्ज की गई है। हालांकि, बिहार का कुल उत्पादन और खरीद आधार छोटा होने के कारण यहां से प्राप्त गेहूं की कुल मात्रा काफी सीमित है।

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