आजकल जो खबरें सामने आ रही हैं, उन्हें देखकर एक किसान के मन में चिंता बढ़ना स्वाभाविक है। इस रिपोर्ट के अनुसार भारतीय परिवारों पर कर्ज 44% तक बढ़ गया है और बचत पिछले एक दशक में सबसे कम स्तर पर पहुंच गई है।
पहली नजर में यह शहरी या मध्यम वर्ग की समस्या लग सकती है, लेकिन इसका सीधा असर गांव और किसानों पर भी पड़ता है। एक किसान के नजरिए से देखें तो यह स्थिति बहुत गंभीर संकेत देती है। जब पूरे देश में कर्ज बढ़ रहा है, तो इसका मतलब यह है कि आम आदमी की आमदनी और खर्च के बीच संतुलन बिगड़ रहा है।
किसान तो पहले से ही कर्ज के दबाव में जी रहा है। खेती में लागत बढ़ती जा रही है, लेकिन आमदनी उसी हिसाब से नहीं बढ़ रही। ऐसे में जब पूरे समाज में कर्ज बढ़ेगा, तो उसका असर बाजार पर पड़ेगा और बाजार का असर सीधे किसान की जेब पर आता है।
खबर में बताया गया है कि अब लोग ज्यादा कर्ज लेकर खर्च कर रहे हैं और बचत कम कर रहे हैं। इसका सीधा मतलब यह है कि भविष्य की सुरक्षा कमजोर हो रही है। किसान के लिए बचत ही उसका सबसे बड़ा सहारा होती है।
जब फसल खराब हो जाए, या बाजार भाव गिर जाए, तो वही बचत काम आती है। लेकिन अगर बचत ही खत्म हो जाए, तो किसान पूरी तरह जोखिम में आ जाता है। एक और चिंता की बात यह है कि अब लोग फिजिकल एसेट जैसे सोना या जमीन में ज्यादा निवेश कर रहे हैं।
गांव में भी यह ट्रेंड बढ़ रहा है। लेकिन किसान के लिए जमीन सिर्फ निवेश नहीं, बल्कि उसका जीवन है। अगर कर्ज के कारण जमीन गिरवी रखने की नौबत आ जाए, तो यह बहुत बड़ा संकट बन जाता है।
रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि पर्सनल लोन और क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। शहरों में तो यह आम बात हो गई है, लेकिन अब इसका असर गांवों में भी दिखने लगा है। कई किसान अब छोटे-मोटे खर्चों के लिए भी उधार लेने लगे हैं।
यह आदत धीरे-धीरे उन्हें कर्ज के जाल में फंसा सकती है। सबसे बड़ी समस्या यह है कि कर्ज लेना आसान हो गया है, लेकिन उसे चुकाना उतना ही मुश्किल। बैंक और फाइनेंस कंपनियां आसानी से लोन दे देती हैं, लेकिन जब फसल खराब होती है या आमदनी कम होती है, तब किसान पर ही सारा दबाव आता है। यही वजह है कि आज गांवों में भी आर्थिक तनाव बढ़ रहा है।
इस स्थिति में सबसे जरूरी है कि किसान अपनी आर्थिक योजना को मजबूत बनाए। जितना हो सके अनावश्यक कर्ज से बचें, खेती की लागत को संतुलित रखें और बचत की आदत को फिर से मजबूत करें। साथ ही सरकार को भी ऐसी नीतियां बनानी चाहिए जो किसानों की आमदनी बढ़ाएं और उन्हें कर्ज के जाल से बाहर निकालें।
अगर समय रहते इस स्थिति को नहीं समझा गया, तो आने वाले समय में यह समस्या और बड़ी हो सकती है। क्योंकि जब कर्ज बढ़ता है और बचत घटती है, तो समाज की आर्थिक नींव कमजोर हो जाती है। अगर आप भी इस बढ़ते कर्ज और घटती बचत को लेकर चिंतित हैं, तो अपनी राय जरूर साझा करें। क्या गांवों में भी यह समस्या बढ़ रही है? कमेंट में जरूर बताएं।
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